Toll Plaza Update: अब दो टोल प्लाजा के बीच कम से कम होगी इतनी दूरी, NHAI का बड़ा ऐलान!

Toll Plaza: 2 टोल प्लाजा के बीच होगी न्यूनतम दूरी, NHAI ने जारी किए नए नियम, जानें सफर के दौरान कितना चुकाना होगा टोल। नीचे पढ़ें पूरी डिटेल।

 
Toll Plaza Update: अब दो टोल प्लाजा के बीच कम से कम होगी इतनी दूरी, NHAI का बड़ा ऐलान!
Toll Plaza Update: देश में हाईवे और एक्सप्रेसवे की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिसके चलते टोल प्लाजा की संख्या भी बढ़ी है। टोल प्लाजा पर कितना टोल देना होगा, यह आपकी यात्रा की दूरी और डेस्टिनेशन पर निर्भर करता है। लेकिन कई वाहन चालक इस बात से अनजान हैं कि कुछ विशेष परिस्थितियों में टोल टैक्स से छूट मिल सकती है। एनएचएआई (NHAI) के नए नियमों के तहत यदि कुछ शर्तें पूरी होती हैं, तो बिना टोल टैक्स दिए भी वाहन आगे बढ़ सकते हैं। साथ ही, दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम दूरी को लेकर भी नए नियम लागू किए गए हैं।

एनएचएआई के नए नियम: 100 मीटर की लाइन पर मिलेगा टोल फ्री

राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने टोल प्लाजा पर ट्रैफिक को सुचारू रखने के लिए कुछ नियम बनाए हैं। नियमों के अनुसार, यदि किसी टोल प्लाजा पर वाहनों की लाइन 100 मीटर से अधिक लंबी हो जाती है, तो वहां मौजूद सभी वाहनों को बिना टोल दिए ही आगे जाने दिया जाएगा। यह नियम 2021 में लागू किया गया था, जिसमें टोल भुगतान के लिए अधिकतम 10 सेकेंड का समय निर्धारित किया गया है।

इस नियम को प्रभावी बनाने के लिए हर टोल प्लाजा पर 100 मीटर की दूरी पर पीली लाइन खींची जाती है। यदि वाहनों की कतार इस पीली रेखा को पार कर जाती है, तो टोल फ्री कर दिया जाता है। जैसे ही लाइन 100 मीटर के अंदर आती है, टोल टैक्स फिर से वसूला जाने लगता है। इस नियम का मकसद हाईवे पर बेवजह लगने वाले ट्रैफिक को रोकना है।

क्या है 60 किलोमीटर का नियम?

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने दो टोल प्लाजा के बीच न्यूनतम दूरी को लेकर भी नियम बनाया है। फी रूल 2008 के अनुसार, दो टोल प्लाजा के बीच की दूरी कम से कम 60 किलोमीटर होनी चाहिए। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में इस दूरी को कम भी किया जा सकता है। यदि किसी क्षेत्र में जगह की कमी, भारी ट्रैफिक, या अन्य तकनीकी कारणों से 60 किलोमीटर की दूरी में दो टोल प्लाजा लगाना आवश्यक होता है, तो सरकार इसकी अनुमति दे सकती है।

टोल टैक्स और रोड टैक्स में क्या फर्क है?

कई लोग टोल टैक्स और रोड टैक्स को एक ही समझते हैं, लेकिन दोनों में बड़ा अंतर है। रोड टैक्स का भुगतान वाहन खरीदते समय आरटीओ को किया जाता है। यह टैक्स इसलिए लिया जाता है, ताकि राज्य के अंदर की सड़कों का रखरखाव किया जा सके।

वहीं, टोल टैक्स एक विशेष सड़क, मुख्य रूप से हाईवे या एक्सप्रेसवे पर यात्रा करने के लिए वसूला जाता है। यह पैसा सरकार के पास नहीं जाता, बल्कि उस हाईवे का निर्माण और देखरेख करने वाली कंपनी या NHAI को दिया जाता है।

नए नियमों से वाहन चालकों को होगा फायदा

एनएचएआई के इन नियमों से वाहन चालकों को बड़ी राहत मिलेगी। खासकर 100 मीटर लाइन नियम और 60 किलोमीटर डिस्टेंस रूल से यात्रियों को अतिरिक्त टोल टैक्स से बचाव मिलेगा और सफर भी सुगम होगा। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में इन नियमों को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि हाईवे पर ट्रैफिक जाम और अनावश्यक टोल टैक्स वसूली को रोका जा सके।