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Property Rules: सिर्फ वसीयत से नहीं मिलेगी संपत्ति? जान लें कानूनी नियम

Property Rules: क्या सिर्फ वसीयत के आधार पर किसी संपत्ति के मालिक बना जा सकता है? इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है, जो संपत्ति विवाद से जुड़े मामलों में अहम साबित हो सकता है। अगर आप भी वसीयत के जरिए संपत्ति के मालिक बनना चाहते हैं, तो इस कानूनी फैसले को जानना जरूरी है। नीचे पढ़ें पूरी डिटेल।
 
Property Rules: सिर्फ वसीयत से नहीं मिलेगी संपत्ति? जान लें कानूनी नियम
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Haryana update, Property Rules: प्रॉपर्टी मालिकों के लिए सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला आया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पावर ऑफ अटॉर्नी (Power of Attorney) और वसीयत (Will) के जरिए मालिकाना हक नहीं मिलता। इसके लिए रजिस्ट्री (Registered Sale Deed) जरूरी है।

पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत क्यों नाकाफी?  Property Rules

कई लोग मानते हैं कि पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत से प्रॉपर्टी का स्वामित्व (Ownership) मिल जाता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक, यह दस्तावेज सिर्फ संपत्ति के उपयोग का अधिकार देते हैं, मालिकाना हक नहीं।

  • पावर ऑफ अटॉर्नी धारक को मालिकाना हक तभी मिलेगा जब वह रजिस्ट्री या सेल डीड निष्पादित (Execution of Sale Deed) करेगा।
  • वसीयत तब तक मान्य नहीं होती जब तक वसीयतकर्ता जीवित होता है।

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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?  Property Rules

सुप्रीम कोर्ट की दो जजों वाली पीठ ने घनश्याम बनाम योगेंद्र राठी केस में कहा कि –

  • किसी भी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक रजिस्ट्री के जरिये ही मिलता है।
  • जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी और वसीयत को मालिकाना हक का आधार नहीं माना जा सकता।
  • यदि किसी राज्य में इन दस्तावेजों को स्वामित्व के प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा रहा है, तो यह कानून का उल्लंघन है।

क्या वसीयत से प्रॉपर्टी ट्रांसफर हो सकती है?  Property Rules

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि –

  • वसीयत से स्वामित्व तभी ट्रांसफर होता है जब वसीयतकर्ता का निधन हो जाता है।
  • जीवित रहते हुए वसीयत में बदलाव किया जा सकता है, इसलिए इसे स्वामित्व का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

मालिकाना हक के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी?  Property Rules

अगर आप प्रॉपर्टी का मालिकाना हक लेना चाहते हैं, तो सुप्रीम  कोर्ट के अनुसार निम्नलिखित दस्तावेज अनिवार्य हैं –

  1. रजिस्ट्री (Registered Conveyance Deed) – प्रॉपर्टी ट्रांसफर का कानूनी प्रमाण।
  2. सेल डीड (Sale Deed) – संपत्ति खरीदने का आधिकारिक दस्तावेज।
  3. लीगल हाइरशिप सर्टिफिकेट (Legal Heirship Certificate) – उत्तराधिकार प्रमाण पत्र।

प्रॉपर्टी ट्रांसफर के लिए पावर ऑफ अटॉर्नी का क्या महत्व?  Property Rules

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि –

  • पावर ऑफ अटॉर्नी धारक तभी मालिक बन सकता है जब वह प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री या सेल डीड कराए।
  • सिर्फ पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर स्वामित्व का दावा नहीं किया जा सकता।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय क्यों अहम है?  Property Rules

इस फैसले से यह साफ हो गया कि कोई भी प्रॉपर्टी सिर्फ पावर ऑफ अटॉर्नी या वसीयत के आधार पर नहीं बेची जा सकती। प्रॉपर्टी मालिकों और खरीदारों के लिए यह फैसला भविष्य में विवादों से बचने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

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